आषाढ़ अमावस्या आज, इन चीजों का करें दान, पितर होंगे प्रसन्न

हर महीने कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि के अगले दिन अमावस्या तिथि पड़ती है। आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को आषाढ़ अमावस्या कहलाती है । आषाढ़ अमावस्या के दिन स्नान और दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और सभी प्रकार के पाप का नाश होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या के दिन पितृ लोक से पितर पृथ्वी पर आते हैं और उम्मीद करते हैं कि अपने वंश से उनको तृप्त किया जाएगा। इस वजह से अमावस्या के दिन पितरों की तृप्ति के लिए तर्पण, पिंडदान, श्राद्ध कर्म आदि करते हैं। इस बार आषाढ़ मास की अमावस्या 5 जुलाई, शुक्रवार को पड़ेगी। अमावस्या की तिथि भगवान विष्णु और पितरों को समर्पित है। इस दिन गंगा स्नान के साथ जप, तप और दान भी किया किया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि अमावस्या पर श्री हरि और पितरों की पूजा करने से जातक के जीवन में खुशियों का आगमन होता है और साथ ही पितृ देव प्रसन्न होते हैं।

आषाढ़ अमावस्या पर करें इन चीजों का दान

पितरों की कृपा करने के लिए आषाढ़ अमावस्या पर श्रद्धा अनुसार गरीब लोगों को अन्न और धन का दान करें।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, अमावस्या पर इन चीजों का दान करने से जातक को पूर्वजों की कृपा प्राप्त होती है।
इसके अलावा गेहूं और चावल का भी दान कर सकते हैं, मान्यता है कि ऐसा करने से पितरों के साथ सूर्य देव की कृपा प्राप्त होती है।
नाराज पितरों को प्रसन्न करने के लिए अमावस्या के दिन पूजा-अर्चना करने के बाद भूमि का दान करें। शास्त्रों में भूमि दान को महादान माना गया है। भूमि दान करने से इंसान को पापों से छुटकारा मिलता है।
आषाढ़ अमावस्या पर आंवला, दूध, घी और दही समेत विशेष चीजों कर दान कर सकते हैं।
ऐसा कहा जाता है कि इन चीजों का दान करने से आर्थिक तंगी दूर होती है और धन लाभ के योग बनते हैं।

आषाढ़ अमावस्या की तिथि

पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 05 जुलाई 2024 को प्रातः 04 बजकर 57 मिनट पर शुरू होगी। वहीं, इसका समापन अगले दिन यानी 06 जुलाई को प्रातः 04: 26 मिनट पर होगा। ऐसे में आषाढ़ अमावस्या 05 जुलाई 2024 को मनाई जाएगी।

आषाढ़ अमावस्या 2024 स्नान मुहूर्त

5 जुलाई को आषाढ़ अमावस्या के दिन आपके लिए स्नान का शुभ समय ब्रह्म मुहूर्त है। ब्रह्म मुहूर्त तड़के 04:08 से 04:48 तक है।

आषाढ़ अमावस्या 2024 तर्पण और श्राद्ध का समय

यदि आप अपने पितरों को खुश करने के लिए उनका श्राद्ध कर्म करना चाहते हैं तो आषाढ़ अमावस्या के दिन प्रातः 11:00 बजे से लेकर दोपहर 02:30 बजे के बीच कर सकते हैं। पितरों के लिए जल से तर्पण दें। कुश, काले तिल, सफेद फूल और जल से पितरों के लिए तर्पण देना चाहिए।

प्रदोष व्रत 2024 – जानें तिथि और शुभ मुहूर्त

प्रदोष व्रत मुख्यतः भगवान शिव की आराधना के लिए समर्पित है। इस दिन साधक महादेव की कृपा प्राप्ति के लिए व्रत रखते हैं और विधि-विधान के साथ महादेव की पूजा-अर्चना करते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि प्रदोष व्रत में किन चीजों का दान करने से साधक को महादेव की विशेष कृपा प्राप्त हो सकती है।

प्रदोष व्रत के दिन की जाती है भगवान शिव की पूजा।
प्रत्येक माह की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है प्रदोष व्रत।
जानिए, प्रदोष व्रत पर किन चीजों के दान से मिलता है लाभ।

पंचांग के अनुसार जब त्रयोदशी तिथि प्रदोष काल के काल में लगती है तो उस दिन भगवान शिव को समर्पित प्रदोष व्रत रखा जाता है। हर माह में दो बार प्रदोष व्रत किया जाता है, एक कृष्ण पक्ष में और दूसरा शुक्ल पक्ष में।

प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त

वैदिक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 3 जुलाई को प्रात: 7 बजकर 10 मिनट पर शुरू होगी। वहीं, इस तिथि का समापन 4 जुलाई प्रात: 5 बजकर 54 मिनट पर होगा। इस दिन प्रदोष काल में पूजा लाभकारी मानी जाती है। इस वजह से इस बार यह व्रत 3 जुलाई के दिन बुधवार को रखा जाएगा।

करें इन चीजों का दान

अन्न दान को हिंदू धर्म में सबसे उत्तम दान माना गया है। ऐसे में आप प्रदोष व्रत के दिन किसी जरूरतमंद को अन्न का दान कर सकते हैं। इससे साधक पर महादेव की कृपा बरसती है और घर-परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

दान करें इस तरह के वस्त्र

प्रदोष व्रत के दिन सफेद रंग के वस्त्रों का दान करना चाहिए। ऐसा करने से व्यक्ति के मान-सम्मान में वृद्धि होती है। साथ ही साधक को करियर में सफलता प्राप्त होती है। लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि पुराने वस्त्रों का दान नहीं करना चाहिए।

बरसेगी महादेव की कृपा

प्रदोष व्रत के दिन उड़द दाल का दान करना बहुत ही लाभकारी माना गया है। ऐसा करने से व्यापार-व्यवसाय में लाभ के योग बनते हैं। वहीं, सोमवार और प्रदोष व्रत के दिन सफेद चीजें जैसे चीनी, चावल और दूध का दान करना अच्छा माना जाता है। इससे जातक की कुंडली में चन्द्रमा मजबूत होता है।

शुक्र प्रदोष व्रत कथा

प्राचीन समय में किसी नगर में तीन मित्र निवास करते थे। उनमें एक राजकुमार, एक ब्राह्मण कुमार और एक घनिक पुत्र था। तीनों मित्रों का विवाह हो चुका था। घनिक पुत्र का गौना नहीं हुआ था। एक दिन तीनों मित्र अपनी अपनी पत्नी की चर्चा कर रहे थे। ब्राह्मण कुमार ने कहा जिस घर में स्त्री नहीं होती है वहां भूतों का वास होता है। यह सुनकर घनिक पुत्र अपनी पत्नी को तुरंत घर लाने का निश्चय करता है। वह अपनी पत्नी को लाने सुसराल पहुंच गया। लेकिन, शुक्र के अस्त चलने के कारण पत्नी के माता-पिता पुत्री को विदा नहीं करना चाहते थे, धनिक पुत्र उनकी बात नहीं माना और जबरन अपनी पत्नी को साथ ले गया।

रास्ते में बैलगाड़ी का पहिया टूट गया और दोनों घायल हो गए। कुछ दूर बाद उनका सामना डाकुओं से हो गया। डाकुओं ने दोनों को लूट लिया। किसी तरह दोनों घर पहुंचे। घर पहुंचते ही धनिक पुत्र को सांप ने काट लिया। वैद्य ने कहा मृत्यु निश्चित है। यह समाचार जान कर दोनों मित्र वहां पहुंचे और धनिक पुत्र के माता-पिता से शुक्र प्रदोष का व्रत रखने को कहा। उन्होंने बहु और बेटे को साथ उसके माता-पिता के पास भेजने के लिए कहा क्योंकि शुक्र के अस्त होने पर बेटी को विदा नहीं करना चाहिए। धनिक ने ऐसा ही किया। पत्नी के माता-पिता के घर पहंचते ही धनिक पुत्र ठीक हो गया। इस चलते मान्यतानुसार शुक्र प्रदोष व्रत करने से घोर कष्ट भी दूर हो सकते हैं।

कैसे करें शिव की पूजा?

भगवान शिव शंकर बहुत भोले हैं, इसीलिए हम उन्हें भोलेभंडारी कहते है , यदि कोई भक्त सच्ची श्रद्धा से उन्हें सिर्फ एक लोटा पानी भी अर्पित करे तो भी वे प्रसन्न हो जाते हैं।

भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए कुछ छोटे और अचूक उपायों के बारे शिवपुराण में भी लिखा है, ये उपाय इतने सरल हैं कि इन्हें बड़ी ही आसानी से किया जा सकता है। हर समस्या के समाधान के लिए शिवपुराण में एक अलग उपाय बताया गया है, ये उपाय इस प्रकार हैं-

शिवपुराण के अनुसार इन छोटे उपायों से भगवान शिव को आसानी से प्रसन्न किया जा सकता है :-

  • भगवान शिव को चावल चढ़ाने से धन की प्राप्ति होती है।
  • तिल चढ़ाने से पापों का नाश हो जाता है।
  • जौ अर्पित करने से सुख में वृद्धि होती है।
  • गेहूं चढ़ाने से संतान वृद्धि होती है।

यह सभी अन्न भगवान को अर्पण करने के बाद जरूरतमंदों में बांट देना चाहिए।

शिवपुराण के अनुसार भगवान शिव को कौन-सा रस (द्रव्य) चढ़ाने से क्या फल मिलता है?

1-बुखार होने पर भगवान शिव को जल चढ़ाने से शीघ्र लाभ मिलता है, सुख व संतान की वृद्धि के लिए भी जल द्वारा भगवान शिव की पूजा उत्तम बताई गई है।

2~तीक्ष्ण बुद्धि के लिए शक्कर मिला दूध भगवान शिव को चढ़ाएं।

3~शिवलिंग पर गन्ने का रस चढ़ाया जाए तो सभी आनंदों की प्राप्ति होती है।

4~शिव को गंगा जल चढ़ाने से भोग व मोक्ष दोनों की प्राप्ति होती है।

5~शहद से भगवान शिव का अभिषेक करने से टीबी रोग में आराम मिलता है।

6~यदि कोई व्यक्ति शारीरिक रूप से कमजोर है तो उसे उत्तम स्वास्थ्य प्राप्त करने के लिए भगवान शिव का अभिषेक गौ माता के शुद्ध घी से करना चाहिए ।

शिवपुराण के अनुसार,भगवान शिव को कौन-सा फूल चढ़ाने से क्या फल मिलता है?

1~ लाल व सफेद आंकड़े के फूल से भगवान शिव का पूजन करने पर मोक्ष की प्राप्ति होती है।

2~चमेली के फूल से पूजन करने पर वाहन सुख मिलता है।

3~अलसी के फूलों से शिव का पूजन करने पर मनुष्य भगवान विष्णु को प्रिय होता है।

4~शमी वृक्ष के पत्तों से पूजन करने पर मोक्ष प्राप्त होता है।

5~बेला के फूल से पूजन करने पर सुंदर व सुशील पत्नी मिलती है।

6~जूही के फूल से भगवान शिव का पूजन करें तो घर में कभी अन्न की कमी नहीं होती।

7~कनेर के फूलों से भगवान शिव का पूजन करने से नए वस्त्र मिलते हैं।

8~हरसिंगार के फूलों से पूजन करने पर सुख-सम्पत्ति में वृद्धि होती है।

9~धतूरे के फूल से पूजन करने पर भगवान शंकर सुयोग्य पुत्र प्रदान करते हैं, जो कुल का नाम रोशन करता है।
लाल डंठलवाला धतूरा शिव पूजन में शुभ माना गया है।

10~दूर्वा से भगवान शिव का पूजन करने पर आयु बढ़ती है।

इन उपायों से प्रसन्न होते हैं भगवान शिव?

1~ सोमवार के 21 बिल्वपत्रों पर चंदन से ॐ नम: शिवाय लिखकर शिवलिंग पर चढ़ाएं, इससे आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी होंगी।

2~अगर आपके घर में किसी भी प्रकार की परेशानी हो तो सोमवार को सुबह घर में गोमूत्र का छिड़काव करें तथा गुग्गुल का धूप दें।

3~ सोमवार को शिवलिंग पर केशर मिला दुध चढाने से विवाह कार्य में आ रही बाधा दूर होती है।

4~ सोमवार की नंदी (बैल) को हरा चारा खिलाएं। इससे जीवन में ‘राजा’ ‘महाराजा’ जैसी सुख-समृद्धि आएगी और मन प्रसन्न रहेगा।

5~ सोमवार को गरीबों को भोजन कराएं, इससे आपके घर में कभी अन्न की कमी नहीं होगी तथा पितरों की आत्मा को शांति मिलेगी।

6~ सोमवार को रोज सुबह जल्दी उठकर स्नान के बाद शिव मंदिर में भगवान शिव का जल से अभिषेक कर उन्हें काले तिल अर्पण करें तत्पश्चात मन ही मन में ॐ नम: शिवाय मंत्र का जप करें। इससे मन को शांति मिलेगी।

सोमवार किसी नदी या तालाब जाकर ॐ नमः शिवाय का जप करते हुए आटे की गोलियां मछलियों को खिलाएं, यह धन प्राप्ति का बहुत ही सरल उपाय है।

शिव की पूजा से बढ़ाए आमदनी ?
सावन के महीने में या सोमवार को किसी भी दिन घर में पारद शिवलिंग की स्थापना करें और उसकी यथा विधि पूजन करें। इसके बाद नीचे लिखे मंत्र का 108 बार जप करें-
ऐं ह्रीं श्रीं ऊं नम: शिवाय: श्रीं ह्रीं ऐं
प्रत्येक मंत्र के साथ बिल्वपत्र पारद शिवलिंग पर चढ़ाएं, बिल्वपत्र के तीनों दलों पर लाल चंदन से क्रमश: ऐं, ह्री, श्रीं लिखें। अंतिम 108 वां बिल्वपत्र को शिवलिंग पर चढ़ाने के बाद निकाल लें तथा उसे अपने पूजन स्थान पर रखकर प्रतिदिन उसकी पूजा करें।

संतान प्राप्ति के लिए अद्भुत उपाय?
सोमवार के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद भगवान शिव का पूजन करें, इसके पश्चात गेहूं के आटे से 11 शिवलिंग बनाएं। अब प्रत्येक शिवलिंग का शिव महिम्न स्त्रोत से जलाभिषेक करें। इस प्रकार 11 बार जलाभिषेक करें, उस जल का कुछ भाग प्रसाद के रूप में ग्रहण करें। यह प्रयोग लगातार 21 दिन तक करें। गर्भ की रक्षा के लिए और संतान प्राप्ति के लिए गर्भ गौरी रुद्राक्ष भी धारण करें। इसे किसी शुभ दिन शुभ मुहूर्त देखकर धारण करें।

उत्तम स्वास्थ्य और बीमारी ठीक करने के लिए उपाय?

किसी सोमवार को पानी में दूध व काले तिल डालकर शिवलिंग का अभिषेक करें, अभिषेक के लिए तांबे के बर्तन को छोड़कर किसी अन्य धातु के बर्तन का उपयोग करें।

अभिषेक करते समय ॐ जूं स: मंत्र का जाप करते रहें। इसके बाद भगवान शिव से रोग निवारण के लिए प्रार्थना करें और प्रत्येक सोमवार को रात में सवा नौ बजे के बाद गाय के सवा पाव कच्चे दूध से शिवलिंग का अभिषेक करने का संकल्प लें। इस उपाय से बीमारी ठीक होने में लाभ मिलता है ।

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