बहुत समय पहले की बात है। एक दिन सूर्य और हवा के बीच यह विवाद छिड़ गया कि उनमें से सबसे शक्तिशाली कौन है। दोनों खुद को एक-दूसरे से बेहतर समझते थे। यह बहस धीरे-धीरे इतनी बढ़ गई कि दोनों ने एक-दूसरे को नीचा दिखाने की ठान ली।
हवा, जो कि बहुत ही घमंडी और जिद्दी स्वभाव की थी, बोली –
“मैं तो इतनी शक्तिशाली हूं कि अगर मैं अपनी पूरी ताकत से बहूं, तो बड़े-बड़े पेड़ों को उखाड़ सकती हूं। मेरी गति और ठंडक इतनी अधिक है कि मैं नदियों और झीलों के पानी को भी जमा सकती हूं। तुम सिर्फ चमक सकते हो, लेकिन मैं तो सब कुछ हिला सकती हूं।”
सूर्य ने शांति से उत्तर दिया –
“शक्ति का मतलब सिर्फ तोड़-फोड़ या डर पैदा करना नहीं होता। असली शक्ति वह होती है जो बिना जोर लगाए भी अपना काम करवा ले। इसलिए घमंड करने से पहले सोचना चाहिए।”
हवा को सूर्य की यह बात बहुत बुरी लगी। वह और ज्यादा चिढ़ गई और बोली –
“अगर तुममें इतना ही बल है, तो चलो, किसी व्यक्ति पर अपनी ताकत आजमा कर देखते हैं। जो उस व्यक्ति से उसका कोट उतरवा सकेगा, वही सबसे शक्तिशाली कहलाएगा।”
सूर्य मुस्कराया और बोला –
“ठीक है, मुझे यह चुनौती स्वीकार है।”
उसी समय रास्ते पर एक आदमी जा रहा था, जिसने मोटा कोट पहन रखा था। ठंड के मौसम में वह तेजी से अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहा था।
हवा ने कहा –
“पहले मैं कोशिश करती हूं। तुम बादलों में छिप जाओ।”
सूर्य सहमत हो गया और बादलों के पीछे छिप गया।
अब हवा ने अपनी ताकत आजमानी शुरू की। पहले वह धीरे-धीरे बहने लगी, लेकिन आदमी ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। फिर हवा ने अपनी गति तेज कर दी। अब वह और भी तेजी से, सर्दी भरी हवा के साथ बहने लगी।
तेज ठंडी हवा के कारण उस आदमी को और भी ज्यादा ठंड लगने लगी। उसने अपने कोट को और कसकर लपेट लिया। हवा और तेज बहती रही, लेकिन जितनी तेज वह बहती, आदमी उतना ही ज्यादा अपने कोट को पकड़ लेता।
कई मिनटों तक हवा अपने पूरे बल से चलती रही, लेकिन वह आदमी को कोट उतारने के लिए मजबूर नहीं कर सकी। अंततः हवा थककर शांत हो गई।
अब सूर्य की बारी थी। वह धीरे-धीरे बादलों के पीछे से निकला और हल्की गर्म धूप के साथ चमकने लगा।
उस आदमी को सूरज की सहलायी धूप महसूस हुई, तो उसने थोड़ी राहत की सांस ली और धीरे-धीरे अपना कोट ढीला कर दिया।
फिर सूर्य ने थोड़ा और तेज चमकना शुरू किया। धूप धीरे-धीरे गर्म होती गई। गर्मी से परेशान होकर अंततः उस आदमी ने अपना कोट उतार दिया।
यह देखकर हवा स्तब्ध रह गई। उसे समझ आ गया कि केवल बल का प्रयोग करने से सब कुछ नहीं होता। कभी-कभी धैर्य, समझदारी और शांति से काम लेना ही असली शक्ति होती है।
वह शर्मिंदा हो गई और सूर्य से बोली –
“मैंने घमंड में आकर अपनी शक्ति का दुरुपयोग किया। लेकिन तुमने बिना किसी बल प्रयोग के, प्रेम और धैर्य से अपना काम सिद्ध कर लिया। आज से मैं खुद को तुमसे श्रेष्ठ नहीं मानूंगी।”
सूर्य मुस्कराया और बोला –
“सच्चा बल वहीं है जो बिना दिखावे के काम करे।”
कहानी से सीख :
कभी भी अपनी शक्ति और योग्यता पर घमंड नहीं करना चाहिए।
अहंकार करने वाला व्यक्ति कभी भी वास्तविक विजय नहीं पा सकता।
शांति, समझदारी और धैर्य से ही सच्ची सफलता प्राप्त होती है।