कैसे करें शिव की पूजा?

भगवान शिव शंकर बहुत भोले हैं, इसीलिए हम उन्हें भोलेभंडारी कहते है , यदि कोई भक्त सच्ची श्रद्धा से उन्हें सिर्फ एक लोटा पानी भी अर्पित करे तो भी वे प्रसन्न हो जाते हैं।

भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए कुछ छोटे और अचूक उपायों के बारे शिवपुराण में भी लिखा है, ये उपाय इतने सरल हैं कि इन्हें बड़ी ही आसानी से किया जा सकता है। हर समस्या के समाधान के लिए शिवपुराण में एक अलग उपाय बताया गया है, ये उपाय इस प्रकार हैं-

शिवपुराण के अनुसार इन छोटे उपायों से भगवान शिव को आसानी से प्रसन्न किया जा सकता है :-

  • भगवान शिव को चावल चढ़ाने से धन की प्राप्ति होती है।
  • तिल चढ़ाने से पापों का नाश हो जाता है।
  • जौ अर्पित करने से सुख में वृद्धि होती है।
  • गेहूं चढ़ाने से संतान वृद्धि होती है।

यह सभी अन्न भगवान को अर्पण करने के बाद जरूरतमंदों में बांट देना चाहिए।

शिवपुराण के अनुसार भगवान शिव को कौन-सा रस (द्रव्य) चढ़ाने से क्या फल मिलता है?

1-बुखार होने पर भगवान शिव को जल चढ़ाने से शीघ्र लाभ मिलता है, सुख व संतान की वृद्धि के लिए भी जल द्वारा भगवान शिव की पूजा उत्तम बताई गई है।

2~तीक्ष्ण बुद्धि के लिए शक्कर मिला दूध भगवान शिव को चढ़ाएं।

3~शिवलिंग पर गन्ने का रस चढ़ाया जाए तो सभी आनंदों की प्राप्ति होती है।

4~शिव को गंगा जल चढ़ाने से भोग व मोक्ष दोनों की प्राप्ति होती है।

5~शहद से भगवान शिव का अभिषेक करने से टीबी रोग में आराम मिलता है।

6~यदि कोई व्यक्ति शारीरिक रूप से कमजोर है तो उसे उत्तम स्वास्थ्य प्राप्त करने के लिए भगवान शिव का अभिषेक गौ माता के शुद्ध घी से करना चाहिए ।

शिवपुराण के अनुसार,भगवान शिव को कौन-सा फूल चढ़ाने से क्या फल मिलता है?

1~ लाल व सफेद आंकड़े के फूल से भगवान शिव का पूजन करने पर मोक्ष की प्राप्ति होती है।

2~चमेली के फूल से पूजन करने पर वाहन सुख मिलता है।

3~अलसी के फूलों से शिव का पूजन करने पर मनुष्य भगवान विष्णु को प्रिय होता है।

4~शमी वृक्ष के पत्तों से पूजन करने पर मोक्ष प्राप्त होता है।

5~बेला के फूल से पूजन करने पर सुंदर व सुशील पत्नी मिलती है।

6~जूही के फूल से भगवान शिव का पूजन करें तो घर में कभी अन्न की कमी नहीं होती।

7~कनेर के फूलों से भगवान शिव का पूजन करने से नए वस्त्र मिलते हैं।

8~हरसिंगार के फूलों से पूजन करने पर सुख-सम्पत्ति में वृद्धि होती है।

9~धतूरे के फूल से पूजन करने पर भगवान शंकर सुयोग्य पुत्र प्रदान करते हैं, जो कुल का नाम रोशन करता है।
लाल डंठलवाला धतूरा शिव पूजन में शुभ माना गया है।

10~दूर्वा से भगवान शिव का पूजन करने पर आयु बढ़ती है।

इन उपायों से प्रसन्न होते हैं भगवान शिव?

1~ सोमवार के 21 बिल्वपत्रों पर चंदन से ॐ नम: शिवाय लिखकर शिवलिंग पर चढ़ाएं, इससे आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी होंगी।

2~अगर आपके घर में किसी भी प्रकार की परेशानी हो तो सोमवार को सुबह घर में गोमूत्र का छिड़काव करें तथा गुग्गुल का धूप दें।

3~ सोमवार को शिवलिंग पर केशर मिला दुध चढाने से विवाह कार्य में आ रही बाधा दूर होती है।

4~ सोमवार की नंदी (बैल) को हरा चारा खिलाएं। इससे जीवन में ‘राजा’ ‘महाराजा’ जैसी सुख-समृद्धि आएगी और मन प्रसन्न रहेगा।

5~ सोमवार को गरीबों को भोजन कराएं, इससे आपके घर में कभी अन्न की कमी नहीं होगी तथा पितरों की आत्मा को शांति मिलेगी।

6~ सोमवार को रोज सुबह जल्दी उठकर स्नान के बाद शिव मंदिर में भगवान शिव का जल से अभिषेक कर उन्हें काले तिल अर्पण करें तत्पश्चात मन ही मन में ॐ नम: शिवाय मंत्र का जप करें। इससे मन को शांति मिलेगी।

सोमवार किसी नदी या तालाब जाकर ॐ नमः शिवाय का जप करते हुए आटे की गोलियां मछलियों को खिलाएं, यह धन प्राप्ति का बहुत ही सरल उपाय है।

शिव की पूजा से बढ़ाए आमदनी ?
सावन के महीने में या सोमवार को किसी भी दिन घर में पारद शिवलिंग की स्थापना करें और उसकी यथा विधि पूजन करें। इसके बाद नीचे लिखे मंत्र का 108 बार जप करें-
ऐं ह्रीं श्रीं ऊं नम: शिवाय: श्रीं ह्रीं ऐं
प्रत्येक मंत्र के साथ बिल्वपत्र पारद शिवलिंग पर चढ़ाएं, बिल्वपत्र के तीनों दलों पर लाल चंदन से क्रमश: ऐं, ह्री, श्रीं लिखें। अंतिम 108 वां बिल्वपत्र को शिवलिंग पर चढ़ाने के बाद निकाल लें तथा उसे अपने पूजन स्थान पर रखकर प्रतिदिन उसकी पूजा करें।

संतान प्राप्ति के लिए अद्भुत उपाय?
सोमवार के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद भगवान शिव का पूजन करें, इसके पश्चात गेहूं के आटे से 11 शिवलिंग बनाएं। अब प्रत्येक शिवलिंग का शिव महिम्न स्त्रोत से जलाभिषेक करें। इस प्रकार 11 बार जलाभिषेक करें, उस जल का कुछ भाग प्रसाद के रूप में ग्रहण करें। यह प्रयोग लगातार 21 दिन तक करें। गर्भ की रक्षा के लिए और संतान प्राप्ति के लिए गर्भ गौरी रुद्राक्ष भी धारण करें। इसे किसी शुभ दिन शुभ मुहूर्त देखकर धारण करें।

उत्तम स्वास्थ्य और बीमारी ठीक करने के लिए उपाय?

किसी सोमवार को पानी में दूध व काले तिल डालकर शिवलिंग का अभिषेक करें, अभिषेक के लिए तांबे के बर्तन को छोड़कर किसी अन्य धातु के बर्तन का उपयोग करें।

अभिषेक करते समय ॐ जूं स: मंत्र का जाप करते रहें। इसके बाद भगवान शिव से रोग निवारण के लिए प्रार्थना करें और प्रत्येक सोमवार को रात में सवा नौ बजे के बाद गाय के सवा पाव कच्चे दूध से शिवलिंग का अभिषेक करने का संकल्प लें। इस उपाय से बीमारी ठीक होने में लाभ मिलता है ।

आज का राशिफल – 02 जुलाई, 2024, मंगलवार


मेष राशि : संतान की ओर से शुभ समाचार मिलेंगे। स्वाभिमान में वृद्धि होगी। आनाज तिलहन में निवेशादि लाभप्रद रहेंगे। बिना सोचे-समझे कोई कार्य न करें, हानि होगी। जीवनसाथी के साथ यात्रा हो सकती है।

वृषभ राशि : आज का दिन आप के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। कई जरूरी डील और नये रिश्ते आज जुडऩे वाले है। अचानक बड़े खर्च सामने आ सकते हैं, जिससे अर्थव्यवस्था बिगड़ सकती है। निजी जीवन में चल रहे तनाव समाप्त होंगे। यात्रा शुभ रहेगी।

मिथुन राशि : कई दिनों से जो बात आप कहना चाह रहे थे, आज कहने का अवसर मिल सकता है। रुके कार्यों में आप के राजनितिक संबंध का लाभ मिलेगा। नए दोस्त बनेंगे, अर्थव्यवस्था में सुधार के योग है। निर्णय समय पर लेना सीखें।

कर्क राशि : आपकी व्यवहार कुशलता और समझदारी से लोग खुश होंगे। आर्थिक लाभ होगा। आप जो भी करें पहले किसी अनुभवी से राय लें फिर किसी कार्य की शुरुआत करें। खोई हुई वस्तु मिल सकती है। उन्नति के प्रयास सफल रहेंगे।

सिंह राशि : अपने कार्य से ज्यादा आप को दूसरों के कार्यों में दखल देना पसंद है। ज्यादा बोलना आप के लिए मुसीबत बन सकता है। कार्यस्थल पर अनुकूल माहौल मिलेगा। आज किसी शिव मंदिर जाकर दूध से अभिषेक करें। आर्थिक लाभ व मानसिक शांति मिलेगी।

कन्या राशि : लंबे समय से अटके काम पूरे होंगे। वाहन खरीदने का मन बनेगा। मांगलिक कार्य की रूपरेखा बनेगी। राजकीय बाधा दूर होकर लाभ की स्थिति बनेगी। धर्म में रुचि बढ़ेगी। नए लोगों से मेल-जोल बढ़ेगा।

तुला राशि : नई योजना सफल होगी। नया व्यवसाय शुरू करने के लिए परिजनों से आर्थिक सहायता लेनी होगी। वाहन, मशीनरी के प्रयोग में सावधानी रखें। कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। पुराने निवेश से लाभ होगा।

वृश्चिक राशि : दोस्तों से अनबन समाप्त होगी। जीवनसाथी से सहयोग मिलेगा। अचानक धनलाभ होगा। कोर्ट-कचहरी आदि में धन लगेगा। बाहरी सहयोग मिलेगा। पड़ोसियों से संबंध सुधरेंगे।

धनु राशि : आपके अपनों द्वारा आपका सहयोग न करने से दुखी होंगे। राजनीति में आप अपना हुनर आजमा सकते हंै। सफलता के योग हैं। वैवाहिक रिश्तों के लिए की गई यात्रा सफल रहेगी। उन्नति के मार्ग प्रशस्त होंगे।

मकर राशि : सभी को साथ में लेकर चलें। वाहन पर खर्च होगा। व्यवसायिक नई योजना से लाभ होगा। पार्टी-का आनंद मिलेगा। विद्यार्थी वर्ग सफलता हासिल करने में सफल होंगे। शरीर कष्ट संभव है। विवाद से बचें।

कुंभ राशि : शुभ समाचार मिल सकता है। शारीरिक कष्ट दूर होंगे। दूसरों से अपेक्षा न करें। नए लोगों से संपर्क होगा। आर्थिक लाभ के अवसर आयेंगे। विदेश जाने में आ रही रुकावट दूर होगी। मित्रों से संपर्क मजबूत होगा।

मीन राशि : आप जो करना चाहते हैं उसके पहले रणनीति तैयार करें। अपनी सूझ-बूझ से रुके काम पूरे करवा लेंगे। आप क्रोध बहुत करते हैं, संयत रहें। पराक्रम में वृद्धि होगी। घर-बाहर पूछ-परख बढ़ेगी। लाभ के अवसर हाथ आएंगे।

योगिनी एकादशी व्रत

आषाढ़ कृष्ण एकादशी को योगिनी एकादशी कहते हैं। हर शाप का होता है यह व्रत करने से निवारण

योगिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु की विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है। पंचांग के अनुसार, यह एकादशी आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को पड़ती है। मान्यता है कि योगिनी एकादशी का व्रत रखने से सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। इसके अलावा मान्यता यह भी है कि इस व्रत के प्रभाव से किसी के दिए हुए श्राप का निवारण हो जाता है।

योगिनी एकादशी तिथि

पंचांग के मुताबिक साल 2024 में योगिनी एकादशी 2 जुलाई को है। एकादशी तिथि का आरंभ 1 जुलाई को सुबह 10 बजकर 26 मिनट से हो रहा है। जबकि एकादशी तिथि की समाप्ति 2 जुलाई को सुबह 8 बजकर 24 मिनट पर होगी। उदयातिथि के अनुसार योगिनी एकादशी व्रत तिथि- 2 जुलाई 2024 रहेगी।

योगिनी एकादशी व्रत पूजा विधि

अन्य एकादशी व्रत के जैसा ही योगिनी एकादशी व्रत का नियम एक दिन पहले यानी दशमी से ही शुरू हो जाता है। ऐसे में दशमी तिथि की रात से ही जौ, गेहूं और मूंग की दाल से बना भोजन नहीं किया जाता है। साथ ही व्रत के दिन नमक वाले भोज्य पदार्थ का सेवन नहीं किया जाता है। एकादशी वाले दिन सुबह स्नान के बाद व्रत का संकल्प लिया जाता है। इसके बाद पूजा स्थल पर भगवान विष्णु की प्रतिमा रखकर पूजा की जाती है। पूजन के दौरान भगवान विष्णु को पीले फूल और पीली मिठाईयों का भोग लगाया जाता है। पूजा खत्म होने के बाद भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की आरती की जाती है।

योगिनी एकादशी व्रत का महत्व

धार्मिक मान्यतानुसार योगिनी एकादशी का व्रत करने से जीवन में सुख-समृद्धि और आनंद की प्राप्ति होती है। कहा जाता है कि योगिनी एकादशी का व्रत तीनों लोकों में प्रसिद्ध है। मान्यता है कि योगिनी एकादशी का व्रत करने से बहुत अधिक पुण्य मिलता है।

योगिनी एकादशी की व्रत कथा

स्वर्ग की अलकापुरी नामक नगरी में कुबेर नाम का राजा था। वह शिव के उपासक था। हेम नाम का माली पूजन के लिए उसके यहां फूल लाया करता था। हेम की पत्नी थी विशालाक्षी। वह बहुत सुंदर स्त्री थी। एक दिन वह मानसरोवर से पुष्प तो ले आया लेकिन मन भटकने की वजह से वो पत्नी को देखकर कामासक्त हो गया और उसके साथ रमण करने लगा। उधर पूजा में विल्म्ब होने के चलते राजा कुबेर ने सेवकों से माली के न आने का कारण पूछा तो सेवकों ने राजा को सारी बात सच बता दी। यह सुनकर कुबेर बहुत क्रोधित हुआ और उसने माली को श्राप दे दिया।

राजा कुबेर ने दिया माली को ये श्राप

गुस्से में कुबेर ने हेम माली से कहा कि तूने कामवश होकर भगवान शिव का अनादर किया है। मैं तुझे श्राप देता हूं कि तू स्त्री का वियोग सहेगा और मृत्युलोक(पृथ्वी)में जाकर कोढ़ी बनेगा। कुबेर के श्राप से हेम माली का स्वर्ग से पतन हो गया और वह उसी क्षण पृथ्वी पर गिर गया। पृथ्वीलोक में आते ही उसके शरीर में कोढ़ हो गया। वो कई समय तक ये दु:ख भोगता रहा।

मार्कण्डेय ऋषि ने बताया कुष्ठ रोग निवारण उपाय

एक एक दिन वह मार्कण्डेय ऋषि के आश्रम में पहुंच गया। उसे देखकर मार्कण्डेय ऋषि बोले तुमने ऐसा कौन सा पाप किया है, जिसके प्रभाव से तुम्हारी यह हालत हो गई। हेम माली ने पूरी बात उन्हें बता दी। उसकी व्यथा सुनकर ऋषि ने उसे योगिनी एकादशी का व्रत करने के लिए कहा। हेम माली ने विधिपूर्वक योगिनी एकादशी का व्रत किया, जिसका उसे सफल परिणाम मिला। वो कुष्ठ रोग से मुक्ति पाकर अपने पुराने रूप में आ गया औूर पत्नी के साथ सुखी जीवन यापन करने लगा।

मनुष्य के बार-बार जन्म-मरण का क्या कारण है ?

एक बार द्वारकानाथ श्रीकृष्ण अपने महल में दातुन कर रहे थे । रुक्मिणी जी स्वयं अपने हाथों में जल लिए उनकी सेवा में खड़ी थीं । अचानक द्वारकानाथ हंसने लगे । रुक्मिणी जी ने सोचा कि शायद मेरी सेवा में कोई गलती हो गई है; इसलिए द्वारकानाथ हंस रहे हैं ।

रुक्मिणी जी ने भगवान श्रीकृष्ण से पूछा—‘प्रभु ! आप दातुन करते हुए अचानक इस तरह हंस क्यों पड़े, क्या मुझसे कोई गलती हो गई ? कृपया, आप मुझे अपने हंसने का कारण बताएं ।’

श्रीकृष्ण बोले—‘नहीं, प्रिये ! आपसे सेवा में त्रुटि होना कैसे संभव है ? आप ऐसा न सोचें, बात कुछ और है ।’

रुक्मिणी जी ने कहा—‘आप अपने हंसने का रहस्य मुझे बता दें तो मेरे मन को शान्ति मिल जाएगी; अन्यथा मेरे मन में बेचैनी बनी रहेगी ।’

तब श्रीकृष्ण ने मुसकराते हुए रुक्मिणी जी से कहा—‘देखो, वह सामने एक चींटा चींटी के पीछे कितनी तेजी से दौड़ा चला जा रहा है । वह अपनी पूरी ताकत लगा कर चींटी का पींछा कर उसे पा लेना चाहता है । उसे देख कर मुझे अपनी मायाशक्ति की प्रबलता का विचार करके हंसी आ रही है ।’

रुक्मिणी जी ने आश्चर्यचकित होते हुए कहा—‘वह कैसे प्रभु ? इस चींटी के पीछे चींटे के दौड़ने पर आपको अपनी मायाशक्ति की प्रबलता कैसे दीख गई ?’

भगवान श्रीकृष्ण ने कहा—‘मैं इस चींटे को चौदह बार इंद्र बना चुका हूँ । चौदह बार देवराज के पद का भोग करने पर भी इसकी भोगलिप्सा समाप्त नहीं हुई है । यह देख कर मुझे हंसी आ गई ।’

इंद्र की पदवी भी भोग योनि है । मनुष्य अपने उत्कृष्ट कर्मों से इंद्रत्व को प्राप्त कर सकता है । सौ अश्वमेध यज्ञ करने वाला व्यक्ति इंद्र-पद प्राप्त कर लेता है । लेकिन जब उनके भोग पूरे हो जाते हैं तो उसे पुन: पृथ्वी पर आकर जन्म ग्रहण करना पड़ता है ।

प्रत्येक जीव इंद्रियों का स्वामी है; परंतु जब जीव इंद्रियों का दास बन जाता है तो जीवन कलुषित हो जाता है और बार-बार जन्म-मरण के बंधन में पड़ता है । वासना ही पुनर्जन्म का कारण है । जिस मनुष्य की जहां वासना होती है, उसी के अनुरूप ही अंतसमय में चिंतन होता है और उस चिंतन के अनुसार ही मनुष्य की गति—ऊंच-नीच योनियों में जन्म होता है । अत: वासना को ही नष्ट करना चाहिए । वासना पर विजय पाना ही सुखी होने का उपाय है ।

बुझै न काम अगिनि तुलसी कहुँ,
विषय भोग बहु घी ते ।

अग्नि में घी डालते जाइये, वह और भी धधकेगी, यही दशा काम की है । उसे बुझाना हो तो संयम रूपी शीतल जल डालना होगा ।

संसार का मोह छोड़ना बहुत कठिन है । वासनाएं बढ़ती हैं तो भोग बढ़ते हैं, इससे संसार कटु हो जाता है । वासनाएं जब तक क्षीण न हों तब तक मुक्ति नहीं मिलती है । पूर्वजन्म का शरीर तो चला गया परन्तु पूर्वजन्म का मन नहीं गया ।

नास्ति तृष्णासमं दु:खं नास्ति त्यागसमं सुखम्।
सर्वांन् कामान् परित्यज्य ब्रह्मभूयाय कल्पते ।।

तृष्णा के समान कोई दु:ख नहीं है और त्याग के समान कोई सुख नहीं है । समस्त कामनाओं—मान, बड़ाई, स्वाद, शौकीनी, सुख-भोग, आलस्य आदि का परित्याग करके केवल भगवान की शरण लेने से ही मनुष्य ब्रह्मभाव को प्राप्त हो जाता है ।

नहीं है भोग की वांछा न दिल में लालसा धन की ।
प्यास दरसन की भारी है सफल कर आस को मेरी ।।

जन्म कुंडली में इस प्रकार की स्थिति हो तो विवाह के बाद चमकती है किस्मत

मेहनत तो आपकी अपनी होती है लेकिन किस्मत हर व्यक्ति की अपनी नहीं होती है, कुछ लोगों की किस्मत उनके बच्चों से तो किसी की माता-पिता से जबकि कुछ लोगों की जीवनसाथी से जुड़ी होती है, आपने देखा भी होगा कि कुछ लोग खूब संघर्ष कर रहे होते हैं लेकिन विवाह के बाद उनके जीवन में अचानक से बदलाव होेते हैं और किस्मत उन पर मेहरबान हो जाती है ज्योतिषाचार्य पं. नरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने बताया कि ज्योतिषशास्त्र में व्यक्ति की कुंडली में नवम भाव को भाग्य स्थान बताया गया है और सप्तम स्थान दांपत्य जीवन को दर्शाता है कुंडली के इन्हीं दोनों घरों के विश्लेषण से पता लगाया जा सकता है कि व्यक्ति का भाग्योदय शादी के बाद होगा या नहीं, इसके साथ ही कुंडली में कुछ ऐसे ग्रह योग होते हैं जो शादी के बाद भाग्योदय का इशारा करते हैं। आइए जानते हैं कुंडली के वह कौन से योग हैं जो शादी के बाद जातक का भाग्योदय कराते हैं…

  • जिस व्यक्ति की कुंडली में सप्तम भाव, सप्तम भाव का कारक ग्रह, एवं सप्तमेश की स्थिति बलवान है, ऐसे व्यक्ति का भाग्योदय विवाह के बाद होता है।
  • यदि व्यक्ति की कुंडली में सप्तमेश यानी सातवें घर का स्वामी जैसे मेष राशि में सातवें घर का स्वामी शुक्र होगा। अगर इनकी कुंडली में शुक्र अपनी उच्च राशि यानी मीन में हों। स्वराशि यानी तुला या वृष में और शुक्र की दृष्टि भाग्य या विवाह स्थान पर हो तब विवाह के बाद व्यक्ति की किस्मत के दरवाजे खुल जाते हैं।
  • सप्तमेश और नवमेश यानी भाग्येश का राशि परिवर्तन भी लाइफ में जीवनसाथी के आगमन के बाद विशेष भाग्योदय करवाने वाला होता है। इस गणना के हिसाब से अगर कुंडली में सातवें स्थान में जो राशि है उसका स्वामी ग्रह नवम भाव में और नवम भाव में जो राशि है उसका स्वामी ग्रह सातवें घर में आ जाए तो इस तरह का शुभ योग बनता है जो विवाह के बाद भाग्योदय कारक होता है।
  • शुक्र का दशमेश और भाग्येश के साथ होना भी जीवनसाथी के भाग्य से सफलता और भाग्योदय करवाता है। यानी कुंडली के नवम भाव में जो राशि है उसका स्वामी ग्रह और नवमें घर में जो राशि है उसका स्वामी ग्रह अगर कुंडली में साथ हो तब विवाह के बाद भाग्योदय योग बनता है।
  • व्यक्ति की कुंडली में सप्तमेश का नवम या दशम भाव में स्थित होना या सप्तमेश का नवम या दशम भाव को देखना भी विवाह उपरांत विशेष सफलता और भाग्योदय देता है।
  • सप्तम स्थान के कारक गुरु और शुक्र बली अवस्था में हो। साथ ही सप्तम स्थान या सप्तमेश को प्रभावित करें, तो व्यक्ति का विवाह के बाद भाग्योदय होता है।
  • पंडित नरेन्द्र कृष्ण शास्त्री के अनुसार सप्तमेश का धन स्थान या लाभ स्थान पर स्थित होकर शुभ ग्रहों के प्रभाव में होना विवाह उपरांत भाग्योदय करवाता है, ऐसे व्यक्ति का जीवनसाथी या तो धनी घर से सम्बंध रखता है या बड़ा ही भाग्यशाली होता है।

गुप्त नवरात्रि पर्व में साधना से पाएं सिद्धियां

आगामी 6 जुलाई से गुप्त नवरात्रि का पर्व प्रारंभ होने बाला है, नवरात्र अर्थात् मां भगवती के नौ रूपों, नौ शक्तियों की पूजा के वो दिन जब मां हर मनोकामना पूरी करती है। यूं तो हर साल चैत्र और शारदीय नवरात्र होते हैं जिनमें लोग पूरी श्रद्धा के साथ घट स्थापना करते हैं लेकिन 2 और नवरात्र भी होते हैं… गुप्त नवरात्र इनके बारे में बहुत ही कम लोग जानते हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार गुप्त नवरात्र वर्ष में 2 बार आते हैं एक माघ महीने में और दूसरा आषाढ़ महीने में..!
गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं की होती है पूजा
✍?गुप्त नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की बजाय दस महाविद्याओं की पूजा की जाती है। ये दस महाविद्याएं हैं – माँ काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, मां धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी।
✍?वर्ष में 2 बार आने वाली गुप्त नवरात्रि बेहद खास होती है। इस नवरात्र की पूजा विधि चैत्र और शारदीय नवरात्रि से बिल्कुल अलग होती है और यही कारण है कि गुप्त नवरात्रि अन्य नवरात्र से बिल्कुल अलग और खास होते हैं। कहते हैं इन नवरात्रों में मां भगवती की देर रात गुप्त रूप से पूजा की जाती है और इसलिए इन्हें गुप्त नवरात्र कहा जाता है।
शैव साधनाओं का पर्व:- गुप्त नवरात्रि के दौरान साधक तांत्रिक क्रियाएं, शैव साधनाएं, श्मशान साधनाएं, महाकाल साधनाएं, आदि करते हैं और सफलता प्राप्त कर लेने पर विभिन्न शक्तियों और दुर्लभ सिद्धियों के स्वामी बन जाते हैं। गुप्त नवरात्रि के दौरान विनाश और संहार के देव, महाकाल और महाकाली की आराधना होती है..!!

कुछ वैदिक अनुष्ठान से यह कार्य भी लाभदायक रहते हैं जैसे………
पति प्राप्ति के लिये मन्त्र-
कात्यायनी महामाये महायोगिन्यधीश्वरि !
नंदगोपसुतम् देवि पतिम् मे कुरुते नम:!!
यह मंत्र दुर्गा सप्तशती का संपुटित पाठ किसी योग्य ब्राहमण से करवाऐ माता से प्रार्थना करें हे माँ मै आपकी शरण में आ गयी मुझे शीघ्र अति शीघ्र सौभाग्य की प्राप्ति हो और मेरी मनोकामना शीघ्र पुरी हो माँ भगवती कि कृपा से अवश्य सफलता प्राप्त होगी।

पत्नी प्राप्ति के मंत्र
पत्नीं मनोरमां देहि मनोवृत्तानु सारिणीम्।
तारिणींदुर्गसंसारसागरस्य कुलोद्भवाम.!!
माँ दुर्गा सप्तशती का संपुटित पाठ किसी योग्य ब्राह्मण से करवाऐ आपकी मनोकामना शीघ्र पूरी होगी.!!

शत्रु पर विजय ओर शांति प्राप्ति के लिए
सर्वाबाधा प्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरि।
एवमेव त्वया कार्यमस्मद्दैरिविनाशनम्.!!

बाधा मुक्ति एवं धन-पुत्रादि प्राप्ति के लिएः
सर्वाबाधा विनिर्मुक्तो धन-धान्य सुतान्वितः।
मनुष्यों मत्प्रसादेन भवष्यति न संशय..!!

Beneficial Plot / Building According to Vastu

Some plots / buildings are given below in natural positions. If any plot / Building is in these natural positions then that is very good. It these properties, major vastu defects affects minor.

IF THERE IS ROAD IN ALL THE THE FOUR SIDE OF PROPERTY

  Being road in all around the plot / building is very good. Residents here will be healthy, soft tempered, religious and devoted to God. They will be high posted in society and will not face financial stringency.

BEING ROAD THRUST IN THE SHOWN PLACES

Road thrust is very good in the shown portions of plot / building.

REGULAR PLOT



NorthEast Road Hit: Being road thrust at the Northeast corner of the plot / building, residents will be intelligent, religious, laborious, honest, educated and high posted. Financial condition will be good. Special benefits to head of the family and first child.




North-NorthEast Road Hit: Being road thrust at the Northeast corner of the plot / building, females will be intelligent, religious, honest, educated and high posted. Financial condition will be good. First child (if female) will be healthy and happy.



East-NorthEast Road Hit:Being road thrust at the Northeast corner of the plot / building, males will be intelligent, religious, laborious, honest, educated and high posted. First child (if female) will be healthy and happy.


West-NorthWest Road Hit: Being road thrust at the West-northwest corner of the plot / building, male members will be intelligent, good prestige in society, working on high post and being politician is also possible. Special benefits to 3rd / 7th child if male.



South-SouthEast Road Hit:Being road thrust at the South-southeast corner of the plot / building, female members will be healthy, soft tempered and good prestige in society. Special benefits to 2nd / 6th child if female.

SKEWED PLOT

NorthEast Road Hit: Being road thrust in the whole Northeast or half portion towards East, residents will be intelligent, religious, laborious, honest, educated and high posted. Financial condition will be good. Special benefits to head of the family and first child.



East Road Hit:Being road thrust at the East corner of the plot / building, male members will be intelligent, healthy, religious, soft tempered and good prestige in society.



North Road Hit: Being road thrust at the North corner of the plot / building, female members will be intelligent, healthy, religious and soft tempered. Financial condition will be good.

CORNER EXTENSION IN PLOT / BUILDING

Extension of Northeast corner in Plot / Building is very good.

REGULAR PLOT



NorthEast Extension: Residents will be intelligent, religious, laborious, honest, educated and high posted. Financial condition will be good. Special benefits to head of the family and first child.



North-NorthEast Extension: Females will be intelligent, religious, honest, educated and high posted. Financial condition will be good. First child (if female) will be healthy and happy.



East-NorthEast Extension: Males will be intelligent, religious, laborious, honest, educated and high posted. First child (if female) will be healthy and happy.

SKEWED PLOT


East Corner Extension:
Male members will be intelligent, healthy, religious, soft tempered and good prestige in society.

BEING HIGH HILLS / BUILDINGS IN WEST / SOUTH / SOUTHWEST

It is good to being hills/high buildings towards West/South/SouthWest side of the plot/building.

Regular Plot



West side hills etc. : Male members will be healthy. Their selfconfidence and prestige would be good. Male members will be some lazy but will gain good results in less labour.




South side hills etc. : Female members will be healthy and soft tempered. Their selfconfidence and prestige would be good. There would not be lack of finance.

Skewed Plot



SouthWest side hills etc. : Residents will be healthy. Their selfconfidence and prestige would be good. Male members will be some lazy but will gain good results in less labour. Special benefits to head of the family and first child.

BEING POOL, SLOPE, WELL, DITCH ETC. IN EAST/NORTH/NORTHEAST

It is good to be pool, slope, well, ditch etc towards East / North / NorthEast.

Regular Plot



East side pool etc. : Male members will be wise, healthy, religious, soft tempered and having good prestige in society.



North side pool etc. : Female members will be wise, healthy, religious and soft tempered. There will also be financial benefits.

Skewed Plot


NorthEast side pool etc. : Residents members will be wise, healthy, religious, honest, educated, high posted and having good prestige in society. There will also be financial benefits. Special benefits to head of the family and first child.

Effect of shape of the building / bedroom

North, South, SouthEast & NorhtWest predominantly influence female folk

In the building / bedroom, North South direction is longer than East West directions. In such houses / bedroom the lady folk would be dominant.

In the building / bedroom, SouthEast NorthWest direction is longer than NorthEast SouthWest direction. In such houses / bedroom the lady folk would be dominant.

In the building / bedroom, SouthEast NorthWest direction is longer than NorthEast SouthWest direction. In such houses / bedroom the lady folk would be dominant.

In this construction / bedroom, the female portions are constricted in size. In such constructions, there may not be any female folk or they may be even dead. If there be main door on the constricted side and only one family lives in such place, the adverse effects are minimal.

East, West, NorthEast & SouthWest predominantly influence male folk

In the building / bedroom, East West direction is longer than North South directions. In such houses / bedroom the men folk would be dominant.

In the building/bedroom, NorthEast SouthWest direction is longer than SouthEast NorthWest direction. In such houses / bedroom the men folk would be dominant.

In this construction / bedroom, the male portions are constricted in size. In such constructions, there may not be any male folk or they may be even dead. If there be main door on the constricted side and only one family lives in such place, the adverse effects are minimal.

If the construction / bedroom is as shown, the influence of male folk will be maximum. If however main door is on the constricted side and only one family is living there, such effects are minimized.

Fixation of Central & Prime Central Area

Plot / Construction / Bedroom & its central area

If a plot / construction / hall or room be say 45 x 27 feet – divide the same into 9 parts as shown. The middle portion is central area measuring 15 x 9 feet.

Divide the middle area further into 9 parts as shown. The marked area is prime central area.

Changes in the position of Central Area

If by construction of a balcony, the length of the plot / construction / hall / room increases such divisions as explain in figure 1 get modified as shown in figure 2.

For example if balcony is 6 feet, length of the total plot becomes 51 feet. Accordingly central area now be 17 x 9 feet (as opposed to 15 x 9 feet earlier) and prime central area would be 3 x 5.6 feet (as oppose to 5 x 3 feet earlier.)

Fixation of central area of plot / construction

If there be defect in the central area of a plot / construction / any room / floor (storey) / a room or any floor / terrace, its effects is marginal. If However such defect is in the prime central area the consequences are serious. If there be bore well, septic tank, underground water tank, sump, heavy machinery, over ground / over head water tank, pillar or column or the floor level is higher or lower in this prime central area – It has a debilitating effect on the head of the family / first child or the whole family. It may even lead to loss of progeny.
            If in a construction, if there be open space in the front and construction is pushed back, this central space of the plot, construction and the bedroom must be separately considered. In all these three central areas there should be no vastu defect.
           The central area should be marked as explain in figure 1. For locating the central areas for construction etc. follow the sequence as explain in figure 1 only. Care be taken that while identifying the central area of construction – only construction dimensions be considered.

Identifying central area in multi storey constructions

Generally it is observed that the cental area of only ground floor is identified. However we may be constructing balconies on the top floor or terrace with the result that the size of the construction is now different and thus the central area of the building itself gets changed. In such a case if there be any construction such as bore well / septic tank / underground water tank or heavy installations in such modified central area or uneven floor level at this place the debilitating effects will visit the head of the family / first child / all even the whole family.
           It is for this reason that the central area of the construction of each storey / floor be taken from the roof / terrace only. if there be defect in the central area of any floor, residents of that floor only will suffer the effects. However the defects of ground floor and roof affects all residents.

Combination of central areas of plot / construction / hall / bedroom

In figure 1, two different plot / constructions are joined. Their central areas are also separate.

In figure 2, as shown in both the constructions if the middle wall is totally or partially removed, it notionally becomes one construction only and hence the central area of the combined plot / construction will only be one. If such modifications are under taken on one floor and no such corrections are applied on the upper or lower floors, it becomes a serious vastu defect causing untold miseries to the house leading to loss of progeny even.
Note : If however the middle wall is not totally disturbed and a door is constructed instead, this defect is overcom

Directions in Each Plot

Regular Plot

Where the principle directions – East, West, North & South are at right angles to the sides of the plot – such plots are called regular plot. Divide the plot into nine parts as shown, the central are and the directions are indicated in the plot.

Skewed Plot

Where the principle directions – East, West, North & South are not at right angles but at the corners to the sides of the plot – such plots are called skewed plot. Divide the plot into nine parts as shown, the central are and the directions are indicated in the plot.



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