कैसे करें शिव की पूजा?

भगवान शिव शंकर बहुत भोले हैं, इसीलिए हम उन्हें भोलेभंडारी कहते है , यदि कोई भक्त सच्ची श्रद्धा से उन्हें सिर्फ एक लोटा पानी भी अर्पित करे तो भी वे प्रसन्न हो जाते हैं।

भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए कुछ छोटे और अचूक उपायों के बारे शिवपुराण में भी लिखा है, ये उपाय इतने सरल हैं कि इन्हें बड़ी ही आसानी से किया जा सकता है। हर समस्या के समाधान के लिए शिवपुराण में एक अलग उपाय बताया गया है, ये उपाय इस प्रकार हैं-

शिवपुराण के अनुसार इन छोटे उपायों से भगवान शिव को आसानी से प्रसन्न किया जा सकता है :-

  • भगवान शिव को चावल चढ़ाने से धन की प्राप्ति होती है।
  • तिल चढ़ाने से पापों का नाश हो जाता है।
  • जौ अर्पित करने से सुख में वृद्धि होती है।
  • गेहूं चढ़ाने से संतान वृद्धि होती है।

यह सभी अन्न भगवान को अर्पण करने के बाद जरूरतमंदों में बांट देना चाहिए।

शिवपुराण के अनुसार भगवान शिव को कौन-सा रस (द्रव्य) चढ़ाने से क्या फल मिलता है?

1-बुखार होने पर भगवान शिव को जल चढ़ाने से शीघ्र लाभ मिलता है, सुख व संतान की वृद्धि के लिए भी जल द्वारा भगवान शिव की पूजा उत्तम बताई गई है।

2~तीक्ष्ण बुद्धि के लिए शक्कर मिला दूध भगवान शिव को चढ़ाएं।

3~शिवलिंग पर गन्ने का रस चढ़ाया जाए तो सभी आनंदों की प्राप्ति होती है।

4~शिव को गंगा जल चढ़ाने से भोग व मोक्ष दोनों की प्राप्ति होती है।

5~शहद से भगवान शिव का अभिषेक करने से टीबी रोग में आराम मिलता है।

6~यदि कोई व्यक्ति शारीरिक रूप से कमजोर है तो उसे उत्तम स्वास्थ्य प्राप्त करने के लिए भगवान शिव का अभिषेक गौ माता के शुद्ध घी से करना चाहिए ।

शिवपुराण के अनुसार,भगवान शिव को कौन-सा फूल चढ़ाने से क्या फल मिलता है?

1~ लाल व सफेद आंकड़े के फूल से भगवान शिव का पूजन करने पर मोक्ष की प्राप्ति होती है।

2~चमेली के फूल से पूजन करने पर वाहन सुख मिलता है।

3~अलसी के फूलों से शिव का पूजन करने पर मनुष्य भगवान विष्णु को प्रिय होता है।

4~शमी वृक्ष के पत्तों से पूजन करने पर मोक्ष प्राप्त होता है।

5~बेला के फूल से पूजन करने पर सुंदर व सुशील पत्नी मिलती है।

6~जूही के फूल से भगवान शिव का पूजन करें तो घर में कभी अन्न की कमी नहीं होती।

7~कनेर के फूलों से भगवान शिव का पूजन करने से नए वस्त्र मिलते हैं।

8~हरसिंगार के फूलों से पूजन करने पर सुख-सम्पत्ति में वृद्धि होती है।

9~धतूरे के फूल से पूजन करने पर भगवान शंकर सुयोग्य पुत्र प्रदान करते हैं, जो कुल का नाम रोशन करता है।
लाल डंठलवाला धतूरा शिव पूजन में शुभ माना गया है।

10~दूर्वा से भगवान शिव का पूजन करने पर आयु बढ़ती है।

इन उपायों से प्रसन्न होते हैं भगवान शिव?

1~ सोमवार के 21 बिल्वपत्रों पर चंदन से ॐ नम: शिवाय लिखकर शिवलिंग पर चढ़ाएं, इससे आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी होंगी।

2~अगर आपके घर में किसी भी प्रकार की परेशानी हो तो सोमवार को सुबह घर में गोमूत्र का छिड़काव करें तथा गुग्गुल का धूप दें।

3~ सोमवार को शिवलिंग पर केशर मिला दुध चढाने से विवाह कार्य में आ रही बाधा दूर होती है।

4~ सोमवार की नंदी (बैल) को हरा चारा खिलाएं। इससे जीवन में ‘राजा’ ‘महाराजा’ जैसी सुख-समृद्धि आएगी और मन प्रसन्न रहेगा।

5~ सोमवार को गरीबों को भोजन कराएं, इससे आपके घर में कभी अन्न की कमी नहीं होगी तथा पितरों की आत्मा को शांति मिलेगी।

6~ सोमवार को रोज सुबह जल्दी उठकर स्नान के बाद शिव मंदिर में भगवान शिव का जल से अभिषेक कर उन्हें काले तिल अर्पण करें तत्पश्चात मन ही मन में ॐ नम: शिवाय मंत्र का जप करें। इससे मन को शांति मिलेगी।

सोमवार किसी नदी या तालाब जाकर ॐ नमः शिवाय का जप करते हुए आटे की गोलियां मछलियों को खिलाएं, यह धन प्राप्ति का बहुत ही सरल उपाय है।

शिव की पूजा से बढ़ाए आमदनी ?
सावन के महीने में या सोमवार को किसी भी दिन घर में पारद शिवलिंग की स्थापना करें और उसकी यथा विधि पूजन करें। इसके बाद नीचे लिखे मंत्र का 108 बार जप करें-
ऐं ह्रीं श्रीं ऊं नम: शिवाय: श्रीं ह्रीं ऐं
प्रत्येक मंत्र के साथ बिल्वपत्र पारद शिवलिंग पर चढ़ाएं, बिल्वपत्र के तीनों दलों पर लाल चंदन से क्रमश: ऐं, ह्री, श्रीं लिखें। अंतिम 108 वां बिल्वपत्र को शिवलिंग पर चढ़ाने के बाद निकाल लें तथा उसे अपने पूजन स्थान पर रखकर प्रतिदिन उसकी पूजा करें।

संतान प्राप्ति के लिए अद्भुत उपाय?
सोमवार के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद भगवान शिव का पूजन करें, इसके पश्चात गेहूं के आटे से 11 शिवलिंग बनाएं। अब प्रत्येक शिवलिंग का शिव महिम्न स्त्रोत से जलाभिषेक करें। इस प्रकार 11 बार जलाभिषेक करें, उस जल का कुछ भाग प्रसाद के रूप में ग्रहण करें। यह प्रयोग लगातार 21 दिन तक करें। गर्भ की रक्षा के लिए और संतान प्राप्ति के लिए गर्भ गौरी रुद्राक्ष भी धारण करें। इसे किसी शुभ दिन शुभ मुहूर्त देखकर धारण करें।

उत्तम स्वास्थ्य और बीमारी ठीक करने के लिए उपाय?

किसी सोमवार को पानी में दूध व काले तिल डालकर शिवलिंग का अभिषेक करें, अभिषेक के लिए तांबे के बर्तन को छोड़कर किसी अन्य धातु के बर्तन का उपयोग करें।

अभिषेक करते समय ॐ जूं स: मंत्र का जाप करते रहें। इसके बाद भगवान शिव से रोग निवारण के लिए प्रार्थना करें और प्रत्येक सोमवार को रात में सवा नौ बजे के बाद गाय के सवा पाव कच्चे दूध से शिवलिंग का अभिषेक करने का संकल्प लें। इस उपाय से बीमारी ठीक होने में लाभ मिलता है ।

आज का राशिफल – 02 जुलाई, 2024, मंगलवार


मेष राशि : संतान की ओर से शुभ समाचार मिलेंगे। स्वाभिमान में वृद्धि होगी। आनाज तिलहन में निवेशादि लाभप्रद रहेंगे। बिना सोचे-समझे कोई कार्य न करें, हानि होगी। जीवनसाथी के साथ यात्रा हो सकती है।

वृषभ राशि : आज का दिन आप के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। कई जरूरी डील और नये रिश्ते आज जुडऩे वाले है। अचानक बड़े खर्च सामने आ सकते हैं, जिससे अर्थव्यवस्था बिगड़ सकती है। निजी जीवन में चल रहे तनाव समाप्त होंगे। यात्रा शुभ रहेगी।

मिथुन राशि : कई दिनों से जो बात आप कहना चाह रहे थे, आज कहने का अवसर मिल सकता है। रुके कार्यों में आप के राजनितिक संबंध का लाभ मिलेगा। नए दोस्त बनेंगे, अर्थव्यवस्था में सुधार के योग है। निर्णय समय पर लेना सीखें।

कर्क राशि : आपकी व्यवहार कुशलता और समझदारी से लोग खुश होंगे। आर्थिक लाभ होगा। आप जो भी करें पहले किसी अनुभवी से राय लें फिर किसी कार्य की शुरुआत करें। खोई हुई वस्तु मिल सकती है। उन्नति के प्रयास सफल रहेंगे।

सिंह राशि : अपने कार्य से ज्यादा आप को दूसरों के कार्यों में दखल देना पसंद है। ज्यादा बोलना आप के लिए मुसीबत बन सकता है। कार्यस्थल पर अनुकूल माहौल मिलेगा। आज किसी शिव मंदिर जाकर दूध से अभिषेक करें। आर्थिक लाभ व मानसिक शांति मिलेगी।

कन्या राशि : लंबे समय से अटके काम पूरे होंगे। वाहन खरीदने का मन बनेगा। मांगलिक कार्य की रूपरेखा बनेगी। राजकीय बाधा दूर होकर लाभ की स्थिति बनेगी। धर्म में रुचि बढ़ेगी। नए लोगों से मेल-जोल बढ़ेगा।

तुला राशि : नई योजना सफल होगी। नया व्यवसाय शुरू करने के लिए परिजनों से आर्थिक सहायता लेनी होगी। वाहन, मशीनरी के प्रयोग में सावधानी रखें। कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। पुराने निवेश से लाभ होगा।

वृश्चिक राशि : दोस्तों से अनबन समाप्त होगी। जीवनसाथी से सहयोग मिलेगा। अचानक धनलाभ होगा। कोर्ट-कचहरी आदि में धन लगेगा। बाहरी सहयोग मिलेगा। पड़ोसियों से संबंध सुधरेंगे।

धनु राशि : आपके अपनों द्वारा आपका सहयोग न करने से दुखी होंगे। राजनीति में आप अपना हुनर आजमा सकते हंै। सफलता के योग हैं। वैवाहिक रिश्तों के लिए की गई यात्रा सफल रहेगी। उन्नति के मार्ग प्रशस्त होंगे।

मकर राशि : सभी को साथ में लेकर चलें। वाहन पर खर्च होगा। व्यवसायिक नई योजना से लाभ होगा। पार्टी-का आनंद मिलेगा। विद्यार्थी वर्ग सफलता हासिल करने में सफल होंगे। शरीर कष्ट संभव है। विवाद से बचें।

कुंभ राशि : शुभ समाचार मिल सकता है। शारीरिक कष्ट दूर होंगे। दूसरों से अपेक्षा न करें। नए लोगों से संपर्क होगा। आर्थिक लाभ के अवसर आयेंगे। विदेश जाने में आ रही रुकावट दूर होगी। मित्रों से संपर्क मजबूत होगा।

मीन राशि : आप जो करना चाहते हैं उसके पहले रणनीति तैयार करें। अपनी सूझ-बूझ से रुके काम पूरे करवा लेंगे। आप क्रोध बहुत करते हैं, संयत रहें। पराक्रम में वृद्धि होगी। घर-बाहर पूछ-परख बढ़ेगी। लाभ के अवसर हाथ आएंगे।

योगिनी एकादशी व्रत

आषाढ़ कृष्ण एकादशी को योगिनी एकादशी कहते हैं। हर शाप का होता है यह व्रत करने से निवारण

योगिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु की विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है। पंचांग के अनुसार, यह एकादशी आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को पड़ती है। मान्यता है कि योगिनी एकादशी का व्रत रखने से सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। इसके अलावा मान्यता यह भी है कि इस व्रत के प्रभाव से किसी के दिए हुए श्राप का निवारण हो जाता है।

योगिनी एकादशी तिथि

पंचांग के मुताबिक साल 2024 में योगिनी एकादशी 2 जुलाई को है। एकादशी तिथि का आरंभ 1 जुलाई को सुबह 10 बजकर 26 मिनट से हो रहा है। जबकि एकादशी तिथि की समाप्ति 2 जुलाई को सुबह 8 बजकर 24 मिनट पर होगी। उदयातिथि के अनुसार योगिनी एकादशी व्रत तिथि- 2 जुलाई 2024 रहेगी।

योगिनी एकादशी व्रत पूजा विधि

अन्य एकादशी व्रत के जैसा ही योगिनी एकादशी व्रत का नियम एक दिन पहले यानी दशमी से ही शुरू हो जाता है। ऐसे में दशमी तिथि की रात से ही जौ, गेहूं और मूंग की दाल से बना भोजन नहीं किया जाता है। साथ ही व्रत के दिन नमक वाले भोज्य पदार्थ का सेवन नहीं किया जाता है। एकादशी वाले दिन सुबह स्नान के बाद व्रत का संकल्प लिया जाता है। इसके बाद पूजा स्थल पर भगवान विष्णु की प्रतिमा रखकर पूजा की जाती है। पूजन के दौरान भगवान विष्णु को पीले फूल और पीली मिठाईयों का भोग लगाया जाता है। पूजा खत्म होने के बाद भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की आरती की जाती है।

योगिनी एकादशी व्रत का महत्व

धार्मिक मान्यतानुसार योगिनी एकादशी का व्रत करने से जीवन में सुख-समृद्धि और आनंद की प्राप्ति होती है। कहा जाता है कि योगिनी एकादशी का व्रत तीनों लोकों में प्रसिद्ध है। मान्यता है कि योगिनी एकादशी का व्रत करने से बहुत अधिक पुण्य मिलता है।

योगिनी एकादशी की व्रत कथा

स्वर्ग की अलकापुरी नामक नगरी में कुबेर नाम का राजा था। वह शिव के उपासक था। हेम नाम का माली पूजन के लिए उसके यहां फूल लाया करता था। हेम की पत्नी थी विशालाक्षी। वह बहुत सुंदर स्त्री थी। एक दिन वह मानसरोवर से पुष्प तो ले आया लेकिन मन भटकने की वजह से वो पत्नी को देखकर कामासक्त हो गया और उसके साथ रमण करने लगा। उधर पूजा में विल्म्ब होने के चलते राजा कुबेर ने सेवकों से माली के न आने का कारण पूछा तो सेवकों ने राजा को सारी बात सच बता दी। यह सुनकर कुबेर बहुत क्रोधित हुआ और उसने माली को श्राप दे दिया।

राजा कुबेर ने दिया माली को ये श्राप

गुस्से में कुबेर ने हेम माली से कहा कि तूने कामवश होकर भगवान शिव का अनादर किया है। मैं तुझे श्राप देता हूं कि तू स्त्री का वियोग सहेगा और मृत्युलोक(पृथ्वी)में जाकर कोढ़ी बनेगा। कुबेर के श्राप से हेम माली का स्वर्ग से पतन हो गया और वह उसी क्षण पृथ्वी पर गिर गया। पृथ्वीलोक में आते ही उसके शरीर में कोढ़ हो गया। वो कई समय तक ये दु:ख भोगता रहा।

मार्कण्डेय ऋषि ने बताया कुष्ठ रोग निवारण उपाय

एक एक दिन वह मार्कण्डेय ऋषि के आश्रम में पहुंच गया। उसे देखकर मार्कण्डेय ऋषि बोले तुमने ऐसा कौन सा पाप किया है, जिसके प्रभाव से तुम्हारी यह हालत हो गई। हेम माली ने पूरी बात उन्हें बता दी। उसकी व्यथा सुनकर ऋषि ने उसे योगिनी एकादशी का व्रत करने के लिए कहा। हेम माली ने विधिपूर्वक योगिनी एकादशी का व्रत किया, जिसका उसे सफल परिणाम मिला। वो कुष्ठ रोग से मुक्ति पाकर अपने पुराने रूप में आ गया औूर पत्नी के साथ सुखी जीवन यापन करने लगा।

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