Musical Shrimad Bhagwat Katha Daily – संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा प्रतिदिन

Musical Shrimad Bhagwat Katha Daily – संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा प्रतिदिन

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जो लोग भागवत कथा का अनुष्ठान करते है उनके घर कभी किसी की अकाल मृत्यु नही होती, उसकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती है ग्रहकृत अरिष्ट योग भी शान्त हो जाते है । वह जब तक पृथ्वी लोक मे रहते है तब तक सुख-शान्ति और आनन्द पुर्वक रहता है और अन्त भगवान श्री कृष्ण के लोक सत्यलोक गोलोक को जाता है।

टीम : ४ व्यक्ति
कथा : 1 दिन

नोट: टीम के आने-जाने व रहने का व्यय आयोजक को करना होगा।

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Description

संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा

सच्चिदानन्दरूपाय विश्वोत्पत्यादि हेतवे
ताप़त्रेैविनाशाय श्री कृष्णाय वयं नुमः

सच्चिदानंदस्वरूप भगवान श्री कृष्ण को हम नमस्कार करते है जो जगत की उत्पत्ति, स्थिति और प्रलय के हेतु है कारण है तथा आदिदैविक, आदिभौतिक और आध्यात्मिक तीनो तापों का नाश करने वाला है।

अनेक पुराणों और महाभारत की रचना के उपरान्त भी भगवान वेदव्यास जी को शान्ति नही मिली तो तब उन्हेने भगवान श्री नारद जी के कहने पर श्रीमदभागवत की रचना की
इस असार संसार को सुख पूर्वक पार कराने के लिए भागवत ही नाव है और भगवान श्रीकृष्ण ही कुशल कर्णधार है अर्थात मल्लाह है। यह श्रीमद्भागवत की कथा जन्म मृत्यु के वन्धन से मुक्ति दिलाने वाली है भगवत् भक्ति को बढाने वाली है तथा भगवान श्री कृष्ण को प्रसन्न करने का प्रथम साधन है। मन की शुद्धि के लिए श्रीमद्भागवत से बढकर कोई साधन नही
यह श्री मद्भागवत की कथा देवताओं को भी दुर्लभ है तभी तो शुकदेव जी के सामने इन्द्रादि देवता अमृत कलश लेकर आए और कहा यह कथा हमे दे दो और उसके वदले हमसे यह अमृतकलश लेलो किन्तु शुकदेव जी ने अमृत को तुक्ष समझ कर नही लिया

ब्रह््मा जी ने सत्य लोक मे तराजू बाॅधकर जब सव साधनों, व्रत, यज्ञ, अनुष्ठान, ध्यान, तप, मुर्तिपूजा आदि को तौला तो सभी साधन तोल मे हिल्के पड गए और अपने महत्व के कारण श्रीमद्भागवत को ही सवसे ज्यादा भारी पाया

यह ग्रन्थ भागवत महापुराण शाश्वत भगवान श्रीकृष्ण का ही स्वरूप है। इसको पढने सुनने या साप्ताहिक अनुष्ठान कराने से मोक्ष की प्राप्ती होती है। पित्रृों को शान्ति मिलती है और पित्र आशीर्वाद देते हुए भगवान श्रीकृष्ण के धाम गोलोक को चले जाते है। जो लोग भागवत कथा का अनुष्ठान करते है उनके घर कभी किसी की अकाल मृत्यु नही होती, उसकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती है ग्रहकृत अरिष्ट योग भी शान्त हो जाते है । वह जब तक पृथ्वी लोक मे रहते है तब तक सुख-शान्ति और आनन्द पुर्वक रहता है और अन्त भगवान श्री कृष्ण के लोक सत्यलोक गोलोक को जाता है।

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