नवग्रह शान्ति पूजा

नवग्रह शान्ति पूजा

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हमारे जीवन मे जो कुछ भी अच्छा या बुरा होता है, उसके पीछे सबसे बडा कारण है ग्रहों की चाल। ग्रहों की दशा-अन्तर्दशा गोचर आदि के कारण ही हमारे जीवन मे उतार चढ़ाव आते रहते हैं। इन तमाम उतार-चढ़ावों को रोकने के लिए और क्रोधित एवं क्रूर ग्रहों को शान्त करने के लिए धार्मिक तथा पौराणिक ग्रन्थो ने वनग्रहों अर्थात जीवन को प्रभावित करने वाले समस्त 9 ग्रहों को शान्त करने का विधान वताया है।

ध्यान दें: यह पैकेज दिल्ली-एन0सी0आर0 और उत्तर प्रदेश के लिए ही मान्य है। इससे बाहर के लिए मंडली के आने-जाने, रहने इत्यादि की व्यवस्था अथवा खर्च यजमान को अलग से देना होगा। अन्य किसी भी जानकारी के लिए कृपया +91-8468055552 पर संपर्क करें।

 

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Description

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार 12 राशियाँ होती हैं – मेष, बृष, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, बृश्चिक, धनु, मकर, कुम्भ, मीन तथा 9 ग्रह होते है – सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, गुरू, शुक्र, शनि, राहू तथा केतु। इनमे से सूर्य ग्रह सिंह राशि का स्वामी है, चन्द्रमा कर्क राशि का, मंगल मेष और वृश्चिक का, बुध मिथुन तथा कन्या का, गुरू धनु व मीन का स्वामी है तथा शनि मकर और कुम्भ का स्वामी है। राहु-केतु किसी भी राशि के स्वामी नही है। जब कोई ग्रह एक राशि से दूसरी राशि मे प्रवेश करता तो इसे ग्रहों की चाल कहते है। इसी चाल के कारण उस राशि मे जहाँ वह ग्रह पहुँच रहा है तथा अन्य राशियों पर भी जहाँ – जहाँ वह देख रहा है उन सब को सकारात्मक या नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है।
प्रत्येक जातक पर सूर्य आदि नौ ग्रहों के प्रभाव होते हैं। जैसे सूर्य के प्रभाव से सम्मान या अपमान प्राप्त होता है। चन्द्रमा से मन की चंचलता, व्याकुलता आदि का पता चलता है। मंगल से कायरता व साहस का बोध होता है। इसी तरह से हर ग्रह के अपने-अपने प्रभाव है जो कि हमारे जीवन को किसी न किसी रूप मे प्रभावित करते हैं। जो ग्रह शुभभाव या राशियों मे हैं वे अपना सकारात्मक प्रभाव देते है और जो अशुभ भाव या अशुभराशियों में है वे अपने दुष्परिणाम देते हैं।

इन्ही अशुभभाव या राशियों मे बैठे ग्रहों के कुप्रभावों को शान्त करने के लिए वैदिक या पौराणिक मन्त्रों की साधना करनी पड़ती है। मन्त्रोंच्चारण के द्वारा जो ग्रह कमजोर है बलहीन है उन्हे बल मिलता है। जो अशुभ ग्रह हैं वे शान्त हो जाते हैं और जो शुभ ग्रह हैं वे अपने और भी अच्छे परिणाम देने लगते हैं।

अतः यदि किसी जातक की कुण्डली मे कोई ग्रह कमजोर हो, शत्रु क्षेत्री हो, नीच का हो, अशुभभाव मे हो या किसी क्रूर ग्रह से दृष्ट हो तो उस ग्रह को शान्त तथा उसको शुुभ बनाने के लिए उस ग्रह का जाप कराइये बल्कि इससे अच्छा है नवग्रह शान्ति कराइये जिससे कि सारे ही ग्रह अनुकूल प्रभाव देने लगें।

पाठ व पूजन प्रक्रिया :

  • पूजन समय 1 दिन

समावेश :

  • पूजन
  • दक्षिणा

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